
यह बात इसी साल बस 3 महीने पहले की ही है. अप्रैल में संसद का विशेष सत्र चल रहा था, जब महिला आरक्षण और नई सीटों के परिसीमन बिल के लिए भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने पूरा जोर लगा दिया. लोकसभा में संविधान संशोधन बिल (131वें संशोधन) के मुद्दे पर वोटिंग के दौरान सरकार जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटा पाने में नाकाम रही थी. अब 20 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र से पहले सरकार ने एक बार फिर से महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने के लिए कमर कसकर तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए लोकसभा में ताजा समीकरण तैयार होने लगा है. नंबर गेम के लिए पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक नजर है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अब किसी भी कीमत पर महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल को पास करवाने की तैयारी में हैं. इसके साथ ही वन नेशन वन इलेक्शन यानी एक देश और एक चुनाव का प्रस्ताव भी आ सकता है. इसको भारत की राजनीति और संसदीय इतिहास में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. इस प्रस्ताव के तहत सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक पहुंच जाएगी. खास बात यह रहेगी कुल बढ़ी हुई सीटों में से 33 फीसदी एक तिहाई सीटें यानी कि 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगी.
